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श्लोक 1.8.78  |
যে-মতে পুত্রের রূপ করে মিশ্র পান
“সশরীরে সাযুজ্য হৈল কিবা তা’ন!” |
ये-मते पुत्रेर रूप करे मिश्र पान
“सशरीरे सायुज्य हैल किबा ता’न!” |
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| अनुवाद |
| श्री मिश्र ने अपने पुत्र के रूप की अमृतमयी सुन्दरता को इस प्रकार पान किया कि ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्होंने अपना शरीर भगवान में ही समाहित कर लिया है! |
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| Shri Mishra so absorbed the nectarine beauty of his son's form that it seemed as if he had merged his body into the Lord himself! |
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