श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  1.8.69 
“কবে হৈবেক মোর যমুনার ভাগ্য”
নিরবধি গঙ্গা এই বলিলেন বাক্য
“कबे हैबेक मोर यमुनार भाग्य”
निरवधि गङ्गा एइ बलिलेन वाक्य
 
 
अनुवाद
गंगा निरंतर प्रार्थना करती थी, “मैं यमुना की तरह भाग्यशाली कब होऊंगी?”
 
Ganga constantly prayed, “When will I be as fortunate as Yamuna?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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