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श्लोक 1.8.67  |
জল-ক্রীডা করে প্রভু শিষ্য-গণ-সঙ্গে
ক্ষণে-ক্ষণে গঙ্গার উপারে যায রঙ্গে |
जल-क्रीडा करे प्रभु शिष्य-गण-सङ्गे
क्षणे-क्षणे गङ्गार उपारे याय रङ्गे |
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| अनुवाद |
| गंगा में क्रीड़ा करते समय भगवान और उनके मित्र कभी-कभी तैरकर दूसरी ओर चले जाते थे। |
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| While playing in the Ganga, the Lord and his friends would sometimes swim to the other side. |
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