vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 1: आदि-खण्ड
»
अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव
»
श्लोक 64
श्लोक
1.8.64
পডুযা-সকল বোলে,—“আজি ঘরে যাহ
কালি যে জিজ্ঞাসি, তাহা বলিবারে চাহ”
पडुया-सकल बोले,—“आजि घरे याह
कालि ये जिज्ञासि, ताहा बलिबारे चाह”
अनुवाद
अन्य छात्रों ने कहा, “आज आप घर जा सकते हैं, और कल हमारे पास आपके लिए और प्रश्न होंगे।”
The other students said, “You can go home today, and tomorrow we will have more questions for you.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×