श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  1.8.54 
জিজ্ঞাসা করহ,—“বুঝি, কা’র কোন্ বুদ্ধি!
বৃত্তি-পঞ্জি-টীকার, কে জানে, দেখি, শুদ্ধি
जिज्ञासा करह,—“बुझि, का’र कोन् बुद्धि!
वृत्ति-पञ्जि-टीकार, के जाने, देखि, शुद्धि
 
 
अनुवाद
“आइये देखें कि वृत्ति, पंजी और टिक के उचित रूपों की व्याख्या कौन कर सकता है।”
 
“Let’s see who can explain the proper forms of instinct, register, and tick.”
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