श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव  »  श्लोक 180
 
 
श्लोक  1.8.180 
কিবা ধার করে, কিবা কোন্ সিদ্ধি জানে?
কোন্ রূপে কা’র সোণা আনে বা কেমনে?”
किबा धार करे, किबा कोन् सिद्धि जाने?
कोन् रूपे का’र सोणा आने वा केमने?”
 
 
अनुवाद
"क्या वह इसे उधार लेता है, या उसे कोई रहस्यमयी शक्ति पता है? वरना, यह सोना किसका है, और उसे कैसे मिलता है?"
 
"Does he borrow it, or does he know some mysterious power? Otherwise, whose gold is this, and how does he get it?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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