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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव
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श्लोक 174
श्लोक
1.8.174
কত-ক্ষণ থাকি’ প্রভু জাহ্নবীর তীরে
তবে পুনঃ আইলেন আপন-মন্দিরে
कत-क्षण थाकि’ प्रभु जाह्नवीर तीरे
तबे पुनः आइलेन आपन-मन्दिरे
अनुवाद
उन्होंने कुछ समय गंगा तट पर बिताया और फिर अपने घर लौट आये।
He spent some time on the banks of the Ganga and then returned to his home.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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