| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव » श्लोक 135 |
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| | | | श्लोक 1.8.135  | গডাগডি যায ঘরে তৈল, ঘৃত, দুগ্ধ
তণ্ডুল, কার্পাস, ধান্য, লোণ, বডী মুদ্গ | गडागडि याय घरे तैल, घृत, दुग्ध
तण्डुल, कार्पास, धान्य, लोण, बडी मुद्ग | | | | | | अनुवाद | | पूरे घर में तेल, घी, दूध, चावल, कपास, धान, नमक, बड़ी और मूंग दाल बिखरी हुई थी। | | | | Oil, ghee, milk, rice, cotton, paddy, salt, gram and moong dal were scattered all over the house. | | ✨ ai-generated | | |
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