श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  1.8.130 
“আনি গিযা” যেই-মাত্র শুনিলা বচন
ক্রোধে রুদ্র হৈলেন শচীর নন্দন
“आनि गिया” येइ-मात्र शुनिला वचन
क्रोधे रुद्र हैलेन शचीर नन्दन
 
 
अनुवाद
'मैं लेकर आता हूँ' यह सुनते ही शचीपुत्र भगवान रुद्र के समान क्रोधित हो गए।
 
On hearing this, Sachiputra became as angry as Lord Rudra.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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