श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.8.13 
শুভ-মাসে, শুভ-দিনে শুভ-ক্ষণ ধরি’
ধরিলেন যজ্ঞ-সূত্র গৌরাঙ্গ-শ্রি-হরি
शुभ-मासे, शुभ-दिने शुभ-क्षण धरि’
धरिलेन यज्ञ-सूत्र गौराङ्ग-श्रि-हरि
 
 
अनुवाद
श्री गौरहरि द्वारा ब्राह्मण धागा स्वीकार करने से महीना, दिन और क्षण सभी शुभ हो गए।
 
By Sri Gaurhari accepting the Brahmin thread, the month, day and moment all became auspicious.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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