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श्लोक 1.8.120  |
যঙ্’রা স্মৃতি-মাত্র পূর্ণ হয সর্ব কাম
সে-প্রভু যাঙ্হার পুত্র-রূপে বিদ্যমান |
यङ्’रा स्मृति-मात्र पूर्ण हय सर्व काम
से-प्रभु याङ्हार पुत्र-रूपे विद्यमान |
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| अनुवाद |
| जिनके स्मरण मात्र से ही सबकी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं, वे ही उनके पुत्र रूप में साक्षात् उपस्थित थे। |
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| The one whose mere remembrance fulfils everyone's wishes, was present in person in the form of his son. |
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