श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव  »  श्लोक 119
 
 
श्लोक  1.8.119 
শচীও দেখিতে গৌরচন্দ্রের শ্রী-মুখ
দেহ-স্মৃতি-মাত্র নাহি, থাকি কিসে দুঃখ?
शचीओ देखिते गौरचन्द्रेर श्री-मुख
देह-स्मृति-मात्र नाहि, थाकि किसे दुःख?
 
 
अनुवाद
श्री गौरचन्द्र का सुन्दर मुख देखकर माता शची को दुःख तो क्या, अपनी आत्मा भी भूल गई।
 
Seeing the beautiful face of Shri Gaurchandra, Mother Shachi not only felt sad but also forgot her own soul.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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