श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 8: जगन्नाथ मिश्र का तिरोभाव  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  1.8.106 
শচী বোলে,—“স্বপ্ন তুমি দেখিলা গোসাঞি
চিন্তা না করিহ ঘরে রহিবে নিমাঞি
शची बोले,—“स्वप्न तुमि देखिला गोसाञि
चिन्ता ना करिह घरे रहिबे निमाञि
 
 
अनुवाद
शची ने कहा, "यद्यपि तुमने ऐसा स्वप्न देखा है, फिर भी चिंता मत करो। निमाई अवश्य ही घर पर रहेंगे।"
 
Shachi said, "Although you have had such a dream, do not worry. Nimai will surely be at home."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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