श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  1.7.92 
এই রূপে জ্ঞান-যোগে মিশ্র মহাধীর
অল্পে-অল্পে চিত্ত-বৃত্তি করিলেন স্থির
एइ रूपे ज्ञान-योगे मिश्र महाधीर
अल्पे-अल्पे चित्त-वृत्ति करिलेन स्थिर
 
 
अनुवाद
इस प्रकार परम संयमी जगन्नाथ मिश्र ने ज्ञान की प्रक्रिया के माध्यम से धीरे-धीरे अपने मन को नियंत्रित किया।
 
Thus Jagannatha Mishra, the supreme ascetic, gradually controlled his mind through the process of knowledge.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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