श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  1.7.87 
এই-মত সবে বুঝাযেন বন্ধু-গণ
তথাপি মিশ্রের দুঃখ না হয খণ্ডন
एइ-मत सबे बुझायेन बन्धु-गण
तथापि मिश्रेर दुःख ना हय खण्डन
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जगन्नाथ मिश्र के सभी मित्रों ने उन्हें शांत करने का प्रयास किया, परंतु उनका दुःख कम नहीं हुआ।
 
In this way all the friends of Jagannath Mishra tried to calm him down, but his sorrow did not subside.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)