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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण
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श्लोक 71
श्लोक
1.7.71
“ছাডিব সṁসার”,—বিশ্বরূপ মনে ভাবে
“চলি’ যাঙা বনে”,—মাত্র এই মনে জগে
“छाडिब सꣳसार”,—विश्वरूप मने भावे
“चलि’ याङा वने”,—मात्र एइ मने जगे
अनुवाद
विश्वरूप ने मन ही मन सोचा, “मैं घर छोड़कर वन में चला जाऊँगा।”
Vishwaroop thought to himself, “I will leave home and go to the forest.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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