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श्लोक 1.7.48  |
জন্ম হৈতে প্রভুরে সকল গোপী-গণে
নিজ-পুত্র হৈতেও স্নেহ করে মনে |
जन्म हैते प्रभुरे सकल गोपी-गणे
निज-पुत्र हैतेओ स्नेह करे मने |
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| अनुवाद |
| भगवान के जन्म के समय से ही गोपियों का भगवान के प्रति अपने पुत्रों से भी अधिक स्नेह था। |
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| From the time of Lord's birth, the Gopis had more affection for Lord than for their own sons. |
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