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श्लोक 1.7.37  |
আপন-প্রস্তাব শুনি’ শ্রী-গৌরসুন্দর
সবারে করেন শুভ-দৃষ্টি মনোহর |
आपन-प्रस्ताव शुनि’ श्री-गौरसुन्दर
सबारे करेन शुभ-दृष्टि मनोहर |
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| अनुवाद |
| उनकी स्तुति सुनकर श्री गौरसुन्दर ने उन पर दया दृष्टि डाली। |
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| Hearing his praise, Shri Gaursundar looked upon him with pity. |
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