श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.7.27 
অদ্বৈত-আচার্য-আদি যত ভক্ত-গণ
জীবের কুমতি দেখি’ করযে ক্রন্দন
अद्वैत-आचार्य-आदि यत भक्त-गण
जीवेर कुमति देखि’ करये क्रन्दन
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अद्वैत आचार्य के नेतृत्व में भक्तगण लोगों की नास्तिक मानसिकता को देखकर रो पड़े।
 
Thus, under the leadership of Advaita Acharya, the devotees wept after seeing the atheistic mentality of the people.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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