श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 201
 
 
श्लोक  1.7.201 
নিরবধি গুপ্ত-ভাবে প্রভু কেলি করে
বৈকুণ্ঠ-নাযক নিজ-অঙ্গনে বিহরে
निरवधि गुप्त-भावे प्रभु केलि करे
वैकुण्ठ-नायक निज-अङ्गने विहरे
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वैकुण्ठ के भगवान अपने घर के आंगन में निरंतर अपनी गोपनीय लीलाओं का आनंद लेते थे।
 
Thus the Lord of Vaikuntha constantly enjoyed His secret pastimes in the courtyard of His house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)