श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 190
 
 
श्लोक  1.7.190 
আপনে ধরিযা শিশু আনিলা জননী
হাসে গৌরচন্দ্র,—যেন ইন্দ্রনীল-মণি
आपने धरिया शिशु आनिला जननी
हासे गौरचन्द्र,—येन इन्द्रनील-मणि
 
 
अनुवाद
तब माता शची ने स्वयं उन्हें अपने आसन से नीचे खींच लिया और भगवान गौरचन्द्र चमकते हुए नीलम के समान मुस्कुराये।
 
Then Mother Shachi herself pulled Him down from His seat, and Lord Gaurachandra smiled like a shining sapphire.
तात्पर्य
वाक्यार्थ : येना इन्द्रनील-मणि का तात्पर्य यह है कि निमाई का स्वर्णिम शरीर अस्वीकृत अशुद्ध खाना पकाने के बर्तनों की कालिख से लिपटा था, इसलिये वे बिलकुल नीलमणि की तरह चमक रहे थे या वे बिलकुल श्री नंद-गोपाल की तरह दिख रहे थे। अन्यथा (श्रीधर स्वामी की श्रीमद् भागवतम् 11.5.32 में दिए वचन "कृष्ण-वर्णं त्विषाकृष्णं" की व्याख्या के अनुसार-"कृष्ण-वर्णं त्विषाकृष्णं") कलियुग के लिए कृष्ण के अवतार नीलमणि की तरह चमकीले दिखाई दिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)