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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 1: आदि-खण्ड
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अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण
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श्लोक 187
श्लोक
1.7.187
ইহাতে শিশুর দোষ তিলার্ধেক নাই”
সবেই বোলেন,—“বাপ, আইস, নিমাঞি!
इहाते शिशुर दोष तिलार्धेक नाइ”
सबेइ बोलेन,—“बाप, आइस, निमाञि!
अनुवाद
“इस बालक में कोई दोष नहीं है।” तब उन्होंने निमाई से कहा, “आओ निमाई!
“There is no fault in this child.” Then he said to Nimai, “Come, Nimai!
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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