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श्लोक 1.7.186  |
কোন্ শত্রু হেন-বুদ্ধি দিল বা তোমারে?
ঘরে মুর্খ করি’ পুত্র রাখিবার তরে? |
कोन् शत्रु हेन-बुद्धि दिल वा तोमारे?
घरे मुर्ख करि’ पुत्र राखिबार तरे? |
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| अनुवाद |
| “किस दुश्मन ने आपको यह विचार दिया है कि अपने बेटे को अशिक्षित घर पर ही रखो। |
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| “Which enemy gave you this idea to keep your son at home uneducated. |
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