श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.7.16 
নিরবধি থাকে সর্ব-বৈষ্ণবের সঙ্গে
কৃষ্ণ-কথা, কৃষ্ণ-ভক্তি, কৃষ্ণ-পূজা-রঙ্গে
निरवधि थाके सर्व-वैष्णवेर सङ्गे
कृष्ण-कथा, कृष्ण-भक्ति, कृष्ण-पूजा-रङ्गे
 
 
अनुवाद
वे निरंतर वैष्णवों के साथ कृष्ण विषय पर चर्चा करते, कृष्ण भक्ति करते तथा कृष्ण की पूजा में संलग्न रहते थे।
 
He constantly discussed Krishna with Vaishnavas, practiced Krishna devotion and remained engaged in Krishna worship.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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