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श्लोक 1.7.158  |
’কে বান্ধিল দুযার?’—করযে ’হায হায’
জাগিলে গৃহস্থ, প্রভু উঠিযা পলায |
’के बान्धिल दुयार?’—करये ’हाय हाय’
जागिले गृहस्थ, प्रभु उठिया पलाय |
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| अनुवाद |
| जब गृहस्वामी चिल्लाया, “मेरा दरवाज़ा किसने बंद कर दिया है?” तो प्रभु भाग गये। |
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| When the householder cried out, “Who has locked my door?” the Lord ran away. |
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