श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 145
 
 
श्लोक  1.7.145 
’পডিযা নাহিক কার্য’ বলিলুঙ্ তোমারে
মুর্খ হৈ’ পুত্র মোর রহু মাত্র ঘরে”
’पडिया नाहिक कार्य’ बलिलुङ् तोमारे
मुर्ख है’ पुत्र मोर रहु मात्र घरे”
 
 
अनुवाद
"इसलिए मैं कहता हूँ कि उसे आगे पढ़ने की ज़रूरत नहीं है। उसे घर पर ही अशिक्षित रहने दो।"
 
"That's why I say he doesn't need to study further. Let him remain uneducated at home."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)