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श्लोक 1.7.130  |
জগত্ পোষণ করে জগতের নাথ
’পাণ্ডিত্যে পোষযে,—কেবা কহিলা তোমাত? |
जगत् पोषण करे जगतेर नाथ
’पाण्डित्ये पोषये,—केबा कहिला तोमात? |
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| अनुवाद |
| "परमेश्वर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का पालन-पोषण करते हैं। तुम्हें किसने बताया कि अच्छी शिक्षा किसी का पालन-पोषण कर सकती है?" |
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| “God nurtures the entire universe. Who told you that good education can nurture someone?” |
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