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श्लोक 1.7.108  |
শুনি’ অদ্বৈতের অতি-অমৃত-বচন
পরম-আনন্দে ’হরি’ বোলে ভক্ত-গণ |
शुनि’ अद्वैतेर अति-अमृत-वचन
परम-आनन्दे ’हरि’ बोले भक्त-गण |
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| अनुवाद |
| श्रीअद्वैत के अमृतमय वचनों को सुनकर सभी भक्तों ने बड़े आनंद से हरि नाम का कीर्तन किया। |
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| Hearing the nectar-like words of Sri Advaita, all the devotees chanted the name of Hari with great joy. |
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