श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 7: श्री विश्वरूप का संन्यास ग्रहण  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  1.7.106 
তোমা’ সবা লঞা হৈবে কৃষ্ণের বিলাস
তবে সে ’অদ্বৈত’ হঙ শুদ্ধ-কৃষ্ণ-দাস
तोमा’ सबा लञा हैबे कृष्णेर विलास
तबे से ’अद्वैत’ हङ शुद्ध-कृष्ण-दास
 
 
अनुवाद
"कृष्ण तुम सबके साथ अपनी लीलाओं का आनंद लेंगे। तब मेरे नाम 'अद्वैत' का अर्थ पूर्ण होगा और मैं भगवान कृष्ण का अनन्य सेवक कहलाऊँगा।"
 
"Krishna will enjoy His pastimes with all of you. Then the meaning of my name 'Advaita' will be complete and I will be called the exclusive servant of Lord Krishna."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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