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श्लोक 1.6.88  |
“নিরবধি এ ব্যভার করযে সবারে
ভাল-মতে গঙ্গা-স্নান না দেয করিবারে |
“निरवधि ए व्यभार करये सबारे
भाल-मते गङ्गा-स्नान ना देय करिबारे |
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| अनुवाद |
| "ये लड़का रोज़ ऐसा ही करता है। किसी को भी चैन से गंगा में नहाने नहीं देता।" |
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| "This boy does this every day. He doesn't let anyone bathe in the Ganga peacefully." |
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