श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 6: भगवान की शिक्षा की शुरुआत और बचपन की शरारत  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  1.6.122 
বিষ্ণু-পূজা-সজ্জ কেনে কর অপহার?
’বিষ্ণু’ করিযাও ভয নাহিক তোমার?”
विष्णु-पूजा-सज्ज केने कर अपहार?
’विष्णु’ करियाओ भय नाहिक तोमार?”
 
 
अनुवाद
"तुम भगवान विष्णु की पूजा की सामग्री क्यों चुराते हो? क्या तुम्हें भगवान विष्णु पर कोई श्रद्धा नहीं है?"
 
"Why do you steal the materials meant for worshipping Lord Vishnu? Don't you have any faith in Lord Vishnu?"
तात्पर्य
करियाओ शब्द का अर्थ है "प्रत्यक्ष बोध के बाद भी।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)