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श्लोक 1.6.102  |
“ভয পাই’ বিশ্বম্ভর পলাইলা ঘরে
ঘরে চল তুমি, কিছু বোল পাছে তা’রে |
“भय पाइ’ विश्वम्भर पलाइला घरे
घरे चल तुमि, किछु बोल पाछे ता’रे |
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| अनुवाद |
| "विश्वम्भर डर के मारे घर चले गए। आप कृपया घर जाकर उनसे बात करें।" |
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| "Visvambhar has gone home out of fear. Please go home and talk to him." |
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