श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 5: भिक्षु ब्राह्मण के भोग को ग्रहण करना  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  1.5.84 
বিপ্র বোলে,—“কার পুত্র এই মহাশয?”
সবেই বোলেন,—“এই মিশ্রের তনয”
विप्र बोले,—“कार पुत्र एइ महाशय?”
सबेइ बोलेन,—“एइ मिश्रेर तनय”
 
 
अनुवाद
तब ब्राह्मण ने पूछा, “यह किसका पुत्र है?” लोगों ने उत्तर दिया, “यह जगन्नाथ मिश्र का पुत्र है।”
 
Then the Brahmin asked, “Whose son is this?” The people replied, “He is the son of Jagannatha Mishra.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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