श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 5: भिक्षु ब्राह्मण के भोग को ग्रहण करना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  1.5.72 
সবেই বোলেন,—“মিশ্র, তুমি ত’ উদার
উহারে মারিযা কোন্ সাধুত্ব তোমার?
सबेइ बोलेन,—“मिश्र, तुमि त’ उदार
उहारे मारिया कोन् साधुत्व तोमार?
 
 
अनुवाद
तब उन्होंने विनती की, "हे मिश्र! आप तो स्वभाव से ही उदार हैं। उन्हें पीटकर आप कौन-सी बुद्धिमत्ता प्रदर्शित करेंगे?"
 
Then he pleaded, "O Mishra! You are generous by nature. What wisdom will you display by beating him?"
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd