श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 5: भिक्षु ब्राह्मण के भोग को ग्रहण करना  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  1.5.66 
“হায হায” করিযা উঠিল বিপ্র-বর
ঠাকুর খাইযা ভাত দিল এক রদ
“हाय हाय” करिया उठिल विप्र-वर
ठाकुर खाइया भात दिल एक रद
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण तुरन्त चिल्लाया, “हाय! हाय!” और भगवान चावल खाकर भाग गये।
 
The Brahmin immediately cried out, "Alas! Alas!" and the Lord ate the rice and ran away.
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