श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 5: भिक्षु ब्राह्मण के भोग को ग्रहण करना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  1.5.54 
হাসিযা বোলেন প্রভু শ্রী-চন্দ্র-বদনে
“আমার কি দোষ, বিপ্র ডাকিলা আপনে?”
हासिया बोलेन प्रभु श्री-चन्द्र-वदने
“आमार कि दोष, विप्र डाकिला आपने?”
 
 
अनुवाद
भगवान ने अपने चन्द्रमा-सदृश मुख से मुस्कुराकर कहा, "मेरा क्या दोष है? ब्राह्मण ने मुझे पुकारा।"
 
The Lord smiled with His moon-like face and said, "What is my fault? The Brahmin called me."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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