| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 5: भिक्षु ब्राह्मण के भोग को ग्रहण करना » श्लोक 39 |
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| | | | श्लोक 1.5.39  | বিপ্র বোলে,—“মিশ্র, তুমি বড দেখি আর্য!
কোন্ জ্ঞান বালকের মারিযা কি কার্য? | विप्र बोले,—“मिश्र, तुमि बड देखि आर्य!
कोन् ज्ञान बालकेर मारिया कि कार्य? | | | | | | अनुवाद | | "मिश्रा, तुम तो सुसंस्कृत आर्य हो! इस अज्ञानी लड़के को पीटने से क्या फ़ायदा?" | | | | "Mishra, you are a cultured Aryan! What is the use of beating this ignorant boy?" | | ✨ ai-generated | | |
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