श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 5: भिक्षु ब्राह्मण के भोग को ग्रहण करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.5.37 
আসিযা দেখেন জগন্নাথ-মিশ্র-বর
ভাত খায, হাসে প্রভু শ্রী-গৌরসুন্দর
आसिया देखेन जगन्नाथ-मिश्र-वर
भात खाय, हासे प्रभु श्री-गौरसुन्दर
 
 
अनुवाद
जगन्नाथ मिश्र वहाँ आये और उन्होंने देखा कि श्री गौरसुन्दर ब्राह्मण के चावल खाते समय मुस्कुरा रहे थे।
 
Jagannatha Mishra came there and saw that Sri Gaurasundara was smiling while eating the Brahmin's rice.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd