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श्लोक 1.5.32  |
সর্ব-ভূত-অন্তর্যামী শ্রী-শচীনন্দন
মনে আছে,—বিপ্রেরে দিবেন দরশন |
सर्व-भूत-अन्तर्यामी श्री-शचीनन्दन
मने आछे,—विप्रेरे दिबेन दरशन |
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| अनुवाद |
| तब समस्त जीवों के परमात्मा श्री शचीनंदन ने ब्राह्मण को दर्शन देने का निर्णय लिया। |
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| Then Shri Sachinandan, the God of all living beings, decided to give darshan to the Brahmin. |
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