श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 5: भिक्षु ब्राह्मण के भोग को ग्रहण करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.5.3 
এক-দিন ডাকি’ বোলে মিশ্র-পুরন্দর
“আমার পুস্তক আন’ বাপ বিশ্বম্ভর!”
एक-दिन डाकि’ बोले मिश्र-पुरन्दर
“आमार पुस्तक आन’ बाप विश्वम्भर!”
 
 
अनुवाद
एक दिन जगन्नाथ मिश्र ने विश्वम्भर को पुकारा, “मेरे प्यारे बेटे, कृपया मेरी पुस्तक लाओ।”
 
One day Jagannatha Mishra called out to Vishvambhara, “My dear son, please bring my book.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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