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श्लोक 1.5.3  |
এক-দিন ডাকি’ বোলে মিশ্র-পুরন্দর
“আমার পুস্তক আন’ বাপ বিশ্বম্ভর!” |
एक-दिन डाकि’ बोले मिश्र-पुरन्दर
“आमार पुस्तक आन’ बाप विश्वम्भर!” |
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| अनुवाद |
| एक दिन जगन्नाथ मिश्र ने विश्वम्भर को पुकारा, “मेरे प्यारे बेटे, कृपया मेरी पुस्तक लाओ।” |
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| One day Jagannatha Mishra called out to Vishvambhara, “My dear son, please bring my book.” |
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