श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 5: भिक्षु ब्राह्मण के भोग को ग्रहण करना  »  श्लोक 158
 
 
श्लोक  1.5.158 
নাচে, গায, হাসে, বিপ্র করযে হুঙ্কার
“জয বাল-গোপাল” বোলযে বার-বার
नाचे, गाय, हासे, विप्र करये हुङ्कार
“जय बाल-गोपाल” बोलये बार-बार
 
 
अनुवाद
फिर वह नाचा, गाया, हँसा और बार-बार चिल्लाया, “जय बाल-गोपाला!”
 
Then he danced, sang, laughed and shouted again and again, “Jai Bala-Gopala!”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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