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श्लोक 1.5.140  |
ক্ষণেকে ধরিযা বিপ্র প্রভুর চরণ
করিতে লাগিলা উচ্চ-রবেতে ক্রন্দন |
क्षणेके धरिया विप्र प्रभुर चरण
करिते लागिला उच्च-रवेते क्रन्दन |
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| अनुवाद |
| तब ब्राह्मण ने भगवान के चरण कमल पकड़ लिये और जोर-जोर से रोने लगा। |
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| Then the Brahmin held the lotus feet of the Lord and started crying loudly. |
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