| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 1: आदि-खण्ड » अध्याय 5: भिक्षु ब्राह्मण के भोग को ग्रहण करना » श्लोक 124 |
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| | | | श्लोक 1.5.124  | প্রভু বোলে,—“অযে বিপ্র, তুমি ত’ উদার
তুমি আমা’ ডাকি’ আন’, কি দোষ আমার? | प्रभु बोले,—“अये विप्र, तुमि त’ उदार
तुमि आमा’ डाकि’ आन’, कि दोष आमार? | | | | | | अनुवाद | | भगवान बोले, "हे ब्राह्मण! तुम तो बड़े उदार हो। तुम मुझे पुकारते हो, तो मेरा क्या दोष है?" | | | | God said, "O Brahmin! You are very generous. If you call me, then what is my fault?" | | ✨ ai-generated | | |
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