श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 5: भिक्षु ब्राह्मण के भोग को ग्रहण करना  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  1.5.110 
বিশ্বরূপে দেখিযা মোহিত বিপ্র-বর
“করিব রন্ধন”—বিপ্র বলিলা উত্তর
विश्वरूपे देखिया मोहित विप्र-वर
“करिब रन्धन”—विप्र बलिला उत्तर
 
 
अनुवाद
विश्वरूप से मोहित होकर ब्राह्मण ने कहा, “ठीक है, मैं खाना बनाऊंगा।”
 
Fascinated by Vishwaroop, the Brahmin said, “Okay, I will cook.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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