श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  1.4.56 
পতি-ব্রতা-গণে ’জয’ দেয চারি-ভিত
সবেই বোলেন,—’বড হৈবে পণ্ডিত’
पति-व्रता-गणे ’जय’ देय चारि-भित
सबेइ बोलेन,—’बड हैबे पण्डित’
 
 
अनुवाद
चारों ओर से सतीत्ववती स्त्रियाँ चिल्ला उठीं, “जय! जय!” सभी ने भविष्यवाणी की कि यह बालक महान विद्वान बनेगा।
 
All around, the chaste women cried out, "Victory! Victory!" They all prophesied that the boy would become a great scholar.
तात्पर्य
श्रीमद् भागवत के प्रति प्रभु कि उत्कण्ठा को देखकर अधम बुद्धि स्त्रियाँ मानती थीं कि नीमाई केवल पढ़ने व पढ़ाने वाले पढ़ाकू विद्वान ही होंगे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)