श्रीमद् भागवत के प्रति प्रभु कि उत्कण्ठा को देखकर अधम बुद्धि स्त्रियाँ मानती थीं कि नीमाई केवल पढ़ने व पढ़ाने वाले पढ़ाकू विद्वान ही होंगे।