श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.4.35 
সবে চারি-মাসের বালক আছে ঘরে
’কে ফেলিল?’—হেন কেহ বুঝিতে না পারে
सबे चारि-मासेर बालक आछे घरे
’के फेलिल?’—हेन केह बुझिते ना पारे
 
 
अनुवाद
किसी को समझ नहीं आ रहा था कि ये सब किसने बिखेर दिया। घर पर सिर्फ़ चार महीने का बच्चा था।
 
No one could understand who had caused all this. There was only a four-month-old baby at home.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)