श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 4: नाम-करण समारोह, बचपन की लीलाएँ, और चोरों का भगवान को हरना  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  1.4.110 
’বাপ’ ’বাপ’ বলি’ এক চোরে লৈল কোলে
“এত-ক্ষণ কোথা ছিলে?”—আর চোর বোলে
’बाप’ ’बाप’ बलि’ एक चोरे लैल कोले
“एत-क्षण कोथा छिले?”—आर चोर बोले
 
 
अनुवाद
एक चोर ने प्रभु को गोद में लिया और कहा, “मेरे प्यारे बच्चे!” और दूसरे चोर ने कहा, “आप इतने देर तक कहाँ थे?”
 
One thief took the Lord in his arms and said, “My dear child!” And the other thief said, “Where were you all this time?”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)