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श्लोक 1.3.8  |
ধাইযা আইলা সবে, যত আপ্ত-গণ
আনন্দ হৈল জগন্নাথের ভবন |
धाइया आइला सबे, यत आप्त-गण
आनन्द हैल जगन्नाथेर भवन |
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| अनुवाद |
| सभी रिश्तेदार जगन्नाथ मिश्र के घर दौड़े चले आये और पूरा घर आनंद से भर गया। |
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| All the relatives came running to Jagannath Mishra's house and the whole house was filled with joy. |
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