श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान के कुंडली की गणना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.3.40 
লোক দেখে,—শচী-গৃহে সর্ব-নদীযায
যে আনন্দ হৈল, তাহা কহন না যায
लोक देखे,—शची-गृहे सर्व-नदीयाय
ये आनन्द हैल, ताहा कहन ना याय
 
 
अनुवाद
शची के घर और पूरे नादिया में लोगों को ऐसा आनंद महसूस हुआ जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता।
 
People in Shachi's house and throughout Nadia felt joy that cannot be described.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)