श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 3: भगवान के कुंडली की गणना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.3.30 
কিছু নাহি—সুদরিদ্র, তথাপি আনন্দে
বিপ্রের চরণে ধরি’ মিশ্র-চন্দ্র কান্দে
किछु नाहि—सुदरिद्र, तथापि आनन्दे
विप्रेर चरणे धरि’ मिश्र-चन्द्र कान्दे
 
 
अनुवाद
किन्तु क्योंकि जगन्नाथ मिश्र अत्यंत गरीब थे, उन्होंने ब्राह्मण के पैर पकड़ लिये और रोने लगे।
 
But because Jagannatha Mishra was extremely poor, he caught hold of the Brahmin's feet and started crying.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)